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Shree Shankaracharya Ashtottara Shata Namavali | श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली

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Shree Shankaracharya Ashtottara Shata Namavali | श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली Free PDF Download


अष्टोत्तर शतनामावली आदिशंकराचार्य के 108 नामों का स्तुति-संग्रह है। यदि आपकी कुंडली में गुरु (Jupiter) या शनि (Saturn) कमजोर हैं और जीवन में आध्यात्मिक शक्ति या मानसिक शांति की कमी है, तो इसका पाठ लाभकारी है।

Shankaracharya Ashtottara Shatanamavali is a divine hymn of devotion and Advaita wisdom. If Jupiter or Saturn is weak in your horoscope and you seek focus, stability, or spiritual elevation,reciting this namavali brings inner clarity and strength. Download Free PDF


1. श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली किसके द्वारा लिखा गया है?

शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली अद्वैत वेदांत के महान आचार्य आदि शंकराचार्य को समर्पित है, परंतु इसका संकलन विभिन्न परंपराओं और मठों द्वारा समय-समय पर किया गया। 

इन 108 नामों में शंकराचार्य के ज्ञान, तप, भक्ति, दया, बुद्धि, और विश्व-कल्याण स्वरूप का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है।

2.श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली किसको समर्पित है?

● यह नमावली आदि शंकराचार्य को समर्पित है, जो अद्वैत वेदांत के प्रणेता, ज्ञान-योग के आचार्य, और धर्म-रक्षक माने जाते हैं।

● इसमें शंकराचार्य को “ज्ञानस्वरूप, ब्रह्मविद्या के प्रदाता, अद्वैत के उपदेशक,और शिवावतार” के रूप में स्तुत किया गया है।


3. श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली वास्तु और ज्योतिष (Astrology, Horoscope horoscope) में क्या मदद करती है?

● जब आपकी कुंडली में गुरु (Jupiter) कमजोर हो, तब ज्ञान की कमी,ध्यान में कमी, विचारों में भ्रम और आध्यात्मिक दिशा का अभाव होता है। यह नमावली गुरु को मजबूत कर विवेक, एकाग्रता और ज्ञान का संचार करती है।

● जब आपकी कुंडली में शनि (Saturn) कमजोर हो, तब मानसिक तनाव, अस्थिरता, भय, कर्म में बाधा और धैर्य की कमी होती है। यह स्तुति शनि को संतुलित कर मन में स्थिरता और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।

● वास्तु-ज्योतिष की दृष्टि से श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर नमावली उन लोगों के लिए उपयोगी है जो एकाग्रता, मनोबल, आत्मविश्वास, और तपस-शक्ति विकसित करना चाहते हों।


4. श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली किसको पढ़ना चाहिए – जिससे उन्हें मदद मिले?

● वे लोग जिनकी कुंडली में गुरु या शनि ग्रह कमजोर हों और जो मानसिक शांति, एकाग्रता, ध्यान या आध्यात्मिक उन्नति में संघर्ष कर रहे हों।

● विद्यार्थी, शोधकर्ता, साधक, योगी, वेदांत-शिष्य, और अध्यात्म-पथ पर आगे बढ़ना चाहने वाले लोगों के लिए यह पाठ अत्यंत शुभ है।

● जो लोग मानसिक भ्रम, अस्थिरता, भय या ध्यान की कमी से जूझ रहे हों वे इस नमावली के माध्यम से मन को स्थिर और शांत कर सकते हैं।

● सामान्य रूप से -
जिसे भी जीवन में दिशा, स्थिरता, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति की आवश्यकता हो, उसे श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ अवश्य करना चाहिए।


5. व्याख्या

● नमावली की आरंभिक पंक्ति कहती है- 

“ॐ शंकराचार्याय नमः। ॐ तपस्विने नमः। ॐ वेदविदे नमः।”

अर्थ -“हे शंकराचार्य, आपको नमस्कार, आप तपस्वी हैं, वेदों के ज्ञाता हैं और अद्वैत के प्रकाशक हैं।”

● आगे एक अन्य नाम आता है- 

“ॐ ब्रह्मविद्याप्रकाशकाय नमः।”

अर्थ -“जो ब्रह्मज्ञान का प्रकाश फै बल्कि ईश्वर-तत्त्व के प्रत्यक्ष अनुभव स्वरूप अवतारित महापुरुष थे,
जिन्होंने अद्वैत वेदांत को जगाया और विश्व को ज्ञान का प्रकाश प्रदान किया।

● नमावली यह संदेश देती है कि ज्ञान, भक्ति, शांति और तप ही वह मार्ग हैं जो साधक को मोक्ष और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाते हैं।

● मूल भाव यह है-  आदि शंकराचार्य के नामों का स्मरण चेतना को पवित्र, मन को शांत, बुद्धि को उज्ज्वल
और जीवन को आध्यात्मिक ऊँचाई की ओर ले जाता है।


निष्कर्ष:

यदि आपकी कुंडली में गुरु या शनि ग्रह कमजोर हों, या आप मानसिक अस्थिरता, भ्रम, तनाव या आध्यात्मिक कमजोरी महसूस कर रहे हों -  तो श्री शंकराचार्य अष्टोत्तर शतनामावली का नियमित पाठ आपको एकाग्रता, विवेक, शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

भक्ति-भाव से शंकराचार्य का स्मरण करें, और ज्ञान के प्रकाश को अपने भीतर प्रकट होने दें।

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